• मोटी कमाई का लालच देकर ठग रहे चीनी
  • तीन महिलाओं समेत 12 गिरफ्तार
  • विदेश में बैठकर चला रहे गिरोह
  • 4.5 करोड़ वाले कई खाते फ्रीज
  • मल्टी-लेवल मार्केटिंग एप डाउनलोड करा बनाते थे निशाना, महिलाओं से मिले 25 लाख

सनसनी ऑफ़ इंडिया नेटवर्क
नई दिल्ली
चीन के दो नागरिक जूनाथन व एरिक चीन में सर्वर वाले एप के जरिये भारतीयों को ठग रहे थे। वे एक एप को भारतीयों से लाइक व फॉलो कराने के नाम ठगी कर रहे थे। दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट ने इस गिरोह का भंडाफोड़ कर दो चीनी व एक तिब्बती महिला समेत 12 लोगों को गिरफ्तार किया है। ये ऑनलाइन मल्टी-लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) एप से लोगों को मोटी कमाई का झांसा देते थे। शुरुआती जांच में फिलहाल एक पेटीएम गेटवे से 40 हजार भारतीय पीड़ितों का पता लगा है। वैसे ठगी का निशाना बने लोगों की संख्या करोड़ों में होने का अनुमान है। पुलिस ने चीनी महिलाओं के पास से 25 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। इनके विभिन्न खातों को फ्रीज किया गया है, जिनमें 4.50 करोड़ रुपये हैं।
साइबर क्राइम यूनिट डीसीपी अन्येश रॉय ने बताया कि भारतीयों के मोबाइल पर संदिग्ध व्हाट्स एप मैसैज आ रहे हैं। इन मैसेज में एक लिंक दिया हुआ था। लिंक से एक एप डाउनलोड होती थी। इसके बाद यह एप खुद अवांछित चीजों को डाउनलोड कर लेती थी। एप में मल्टी-लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) अभियान में जुडने से रोज 30 मिनट से भी कम लगाकर 300 रुपये कमाई का झांसा दिया जा रहा था। कमाई के नाम पर काफी लोगों ने इस संदिग्ध एप को डाउनलोड कर लिया। जांच में पता लगा कि लोगों के पास चीनी एप न्यू वर्ल्ड व यूकेपी आदि लोड होती थीं। इनको भारत सरकार पहले ही प्रतिबंधित कर चुकी है।

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए चीनी नागरिकों की पहचान चाओहॉन्ग डेंग डॉयोन्ग (27) और वू जियाझी (54) के रूप में की गई है .इसके अलावा 12 आरोपियों में से एक तिब्बती नागरिक भी शामिल है.

महिला की शिकायत पर शुरू हुई थी जांच
डीसीपी ने बताया कि जांच के दौरान एक महिला ने धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई। उसने कहा कि एप के माध्यम से उससे 50 हजार रुपये ठगे गए हैं। एसीपी आदित्य गौतम की टीम ने जांच शरू की। साइबर क्राइम यूनिट ने 13 जनवरी को विभिन्न जगहों पर दबिश दी और दो चीनी महिलाओं सिचुआन की रहने वाली चाओहोंग देंग दाओयोंग और वू जियाजी व एक तिब्बती महिला समेत 12 लोगों को गिरफ्तार किया। बाकी सभी आरोपी भारतीय हैं।

ऐसे करते थे ठगी
व्हाट्स एप पर मैसेज में एक लिंक भेजकर एप डाउनलोड कराया जाता था। यह एप शॉर्ट यूआरएल वाला होता था। इसे डाउनलोड करते ही एक वीडियो खुलता था। इस वीडियो को फॉलो व लाइक करने का प्रस्ताव होता था। इसमें प्रति लाइक छह रुपये देने का वायदा करते थे। लोगों को वास्तव में पैसा नहीं मिलता, लेकिन उनके खाते में दिखता रहता। इसके बाद ये कहते थे कि इस वीडियो को अन्य लोगों से लाइक व फॉलो कराएं तो उसका भी इन्सेंटिव मिलेगा। इसके अलावा ये लोगों से कहते थे कि अगर वे वीआईपी अकाउंट बनाएंगे तो ज्यादा मुनाफा होगा और ज्यादा पैसे कमा सकेंगे। वीआईपी अकाउंट बनाने के नाम पर तीन से 50 हजार रुपये तक वसूले जाते थे। इस तरह ये करोड़ों भारतीयों से ठगी कर चुके हैं।

सेल कंपनियों के जरिये विदेश जा रहा धन
जांच में पुलिस को पता लगा कि भारतीयों का पैसा सेल कंपनियों में जा रहा था। इन कंपनियों के निदेशक चीनी व भारतीय हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि पैसा इन कंपनियों से किस देश में और कैसे जा रहा है। बताया जा रहा है कि पैसा क्रिप्टो करेंसी से भेजा जा रहा है।

चीनी सर्वर से जुड़ा होता था एप
दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, जांच में पता चला है कि जो एप ये लोड कराते थे, वह चीनी सर्वर से कनेक्ट होती थाी। करोड़ों भारतीयों ने इस एप को लोड तो कर लिया, लेकिन उन्हें पता नहीं था कि इसका कंट्रोल कहां है। ऐसे में लोगों के मोबाइल से उनकी निजी जानकारी बाहर जा रही थी। साथ ही ये देशविरोधी वीडियो चलाकर करोड़ों भारतीय की मानसिकता बदलने का प्रयास भी कर रहे थे। एप के जरिए ये लोगों की डिवाइस पर पूरी तरह कंट्रोल कर लेते थे।

देशविरोधी गतिविधियां चलाने का अंदेशा
दिल्ली पुलिस के अधिकारियों को आशंका है कि ये लोग भारतीयों के बीच देशविरोधी चीजें प्रचलित कर उनके दिमाग को हैक करने को कोशिश कर रहे हैं। अंदेशा है कि ये कभी भी देश में उन्माद फैला सकते हैं। यह सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर चुनौती है। उन्होंने आशंका जताई है कि इस तरह के और भी एप चल रहे हो सकते हैं। बताया जाता है कि इस गिरोह के सरगना चीनी नागरिक भारत में आए थे और जून-जुलाई में लौट गए।