‘सट्टा किंग’ ललित वर्मा उर्फ नीटू दिल्ली से गिरफ्तार, सट्टे से कमाई 100 करोड़

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विजय कुमार दिवाकर
पिछले छह साल से फरार और माफिया डॉन व पूर्व सांसद डीपी यादव का करीबी 40 वर्षीय सट्टे की दुनिया का किंग ललित कुमार उर्फ़ नीटू आखिर क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ ही गया। मकोका के मामले में फरार चल रहे आरोपी ललित की गिरफ्तारी पर दिल्ली पुलिस ने 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया हुआ था। Well Organized Crime का kingpin ललित कुमार ने देशभर में सट्टे की कमाई से 100 करोड़ से अधिक की प्रॉपर्टी अर्जित की हुई है। पिछले सात साल से लगातार पुलिस की आंखों में धूल झोंककर वह अलग अलग राज्यों में अपना सट्टे का धंधा चला रहा था। गिरफ्तारी के बाद अपराध शाखा की टीम ने ललित को कोर्ट में पेश किया जहां से उसे 10 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है ।
अपराध शाखा की पुलिस उपायुक्त मोनिका भारद्वाज ने बताया कि वर्ष 2015 में भजनपुरा थाने में 27 नवंबर को Organized सट्टा चलाने वालों के खिलाफ मकोका का मामला दर्ज कर रोशनलाल वर्मा, अमरनाथ बजाज, योगेश्वर दयाल शर्मा व अन्यों को गिरफ्तार किया था। पुलिस की पूछताछ में रोशनलाल व अमरनाथ ने ललित वर्मा का नाम लिया। ललित रोशनलाल का बेटा था। छानबीन के दौरान पता चला कि देशभर में फैला सट्टे का कारोबार ललित वर्मा व उसके सहयोगी पुरुषोत्तम चला रहे हैं। सट्टा चलाने में उनको पूर्व सांसद व माफिया डॉन रहे डीपी यादव का भी सरंक्षण मिला हुआ है। पुलिस ने आरोपी ललित की तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं चला। ललित के खिलाफ भी मकोका का मामला दर्ज किया गया। इस दौरान अदालत ने आरोपी ललित के खिलाफ पहले गैर जमानती वारंट जारी किए। बाद में 16 जनवरी 2017 को ललित को भगोड़ा घोषित कर दिया गया था। पुलिस लगातार उसकी तलाश करती रही।
बाद में वांटेड ललित की गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपये का इनाम भी घोषित कर दिया गया था। छानबीन के दौरान पुलिस की टीम को पता चला कि वांटेड आरोपी ललित कुमार उर्फ़ ​​नीटू हिमाचल प्रदेश में कहीं छिप गया है और वहां से ही सट्टे के अवैध धंधे का कामकाज संभाल रहा है और कभी कभार दिल्ली भी आ जाता है। आरोपी ने अपने सट्टे के कारोबार से 100 करोड़ से अधिक की प्रॉपर्टी भी अर्जित कर ली।
क्राइम ब्रांच चाणक्यपुरी ने आरोपी की तलाश शुरू की। इस दौरान 16 जनवरी 2022 को टीम को सूचना मिली कि आरोपी अपने स्थायी पते ए 50, पूर्वी उत्तम नगर पर आने वाला है।
सूचना मिलते ही अपराध शाखा की पुलिस उपायुक्त मोनिका भारद्वाज ने वांटेड kingpin ललित कुमार को दबोचने के लिए एसीपी उमेश बर्थवाल की supervision और इंस्पेक्टर सतेंद्र मोहन क्राइम ब्रांच चाणक्यपुरी के नेतृत्व में एसआई कमल कुमार, राकेश कुमार, सुरेंदर राणा, इमरान खान, मिंटू सिंह, एएसआई गुलाब सिंह, रमेश कुमार व कांस्टेबल नवीन कुमार की एक टीम बनाई।
सट्टे की दुनिया का किंग ललित कुमार उर्फ़ नीटू

उसके बाद टीम ने आसपास के इलाके की रेकी की गई और रात करीब साढ़े नौ बजे वांटेड आरोपी ललित कुमार अपने घर आया तो पुलिस टीम को देखकर भागने की कोशिश करने लगा। लेकिन पुलिस टीम ने मामूली हाथापाई के बाद उसे दबोच लिया। बाद में उसे गिरफ्तार कर चाणक्यपुरी स्थित थाने लाया गया।

अपराध शाखा की पुलिस उपायुक्त मोनिका भारद्वाज ने बताया कि सट्टे की दुनिया में कदम रखने के बाद पहली बार आरोपी एफआईआर संख्या 109/10 अंडर सेक्शन 420, 467, 468, 471,120बी और 13 ए गैंबलिंग एक्ट के तहत पंजाब के मॉडल टाउन थाना इलाके में गिरफ्तार हुआ था। वहां से जमानत मिलने के बाद आरोपी कभी उस केस में पेश नहीं हुआ। उसे लुधियाना की अदालत ने भी भगोड़ा घोषित कर दिया था । लेकिन अंडरग्रॉउंड होकर वांटेड आरोपी ललित कुमार 2010 से लगातार सट्टे का धंधा चलाता रहा।
पूछताछ में आरोपी ललित वर्मा उर्फ नीटू ने खुलासा किया कि वह 2006 से अपने पिता के साथ सट्टे के अवैध धंधे में जुड़ा था। ललित का पिता रोशनलाल वर्मा भी दिल्ली का बड़ा सट्टा खिलाड़ी माना जाता था। वर्ष 2015 में थाना भजनपुरा पुलिस स्टाफ ने उसके पिता को मकोका के एक मामले में एफआईआर संख्या 1227/2015 में गिरफ्तार किया था। पिता की गिरफ्तारी के बाद ललित कुमार ने दिल्ली छोड़ दी थी। पुलिस ने उसकी तलाश में भी उसके पते पर छापा मारा था। अपने पिता की गिरफ्तारी के बाद उसने पूरे सिंडिकेट को अपने कब्जे में ले लिया और खुद अंडरग्रॉउंड होकर सिंडिकेट को चलाता था। पुलिस की गिरफ्तारी के बाद रोशनलाल और अमरनाथ दोनों की मौत हो गई थी। उसने आगे बताया कि देशभर में सट्टे की कमाई से 100 करोड़ से अधिक की कमाई की है।
पुलिस की पूछताछ में आरोपी ललित कुमार ने बताया कि उसका जन्म गीता कालोनी इलाके में हुआ था। उसके पिता का पुराना सट्टे का कारोबार था। पिता ने उसे पढ़ाकर इस कारोबार से दूर रखने का प्रयास किया। ऐसा हुआ भी ललित ने 12वीं के बाद डीयू से ग्रेजुएशन भी कर लिया। लेकिन वह पिता के कारोबार की ओर आकर्षित हो गया। उसने वर्ष 2006 में अपने पिता के सट्टे के कारोबार को बड़ा कर उसे देशभर में फैला दिया। यहां तक उनके सट्टे को माफिया डॉन रहे डीपी यादव ने भी सरंक्षण दिया। ललित शादीशुदा है और उसकी पत्नी व दो बच्चे हैं जो स्कूल जाते हैं। पुलिस आरोपी को रिमांड पर लेकर उससे पूछताछ कर रही है।
सनसनी ऑफ़ इंडिया नेटवर्क