सनसनी ऑफ़ इंडिया नेटवर्क
नई दिल्ली । रेलवे पुलिस ने रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के कांस्टेबल की आड़ में गांजे की तस्करी करने के मामले का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने उत्तर प्रदेश (यूपी) के मथुरा निवासी रोहित कुमार को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 72.5 किलो गांजा और आरपीएफ कांस्टेबल के दो फर्जी पहचान पत्र बरामद हुए हैं। वह विशाखापट्टनम से रेल द्वारा गांजा लाकर उसकी आपूर्ति दिल्ली-एनसीआर सहित पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश में करता था।

सुरक्षा कर्मियों को शक ना हो इसके लिए वह जवानों द्वारा रेल यात्रा में प्रयुक्त लोहे के काले बक्से में गांजा भरकर लाता था। आरोपित इससे पहले भी गांजा की तस्करी कर चुका है। रेलवे पुलिस अब गिरोह के मुख्य सरगना के अलावा दिल्ली के इसके चार सहयोगियों की गिरफ्तारी के प्रयास में जुट गई है।

रेलवे के पुलिस उपायुक्त हरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पुलिसकर्मियों ने 24 अगस्त को कुली द्वारा ले जाए जा रहे काले रंग के लोहे के बड़े बक्से के साथ एक संदिग्ध को जाता देखा। आम तौर पर इस तरह के बक्से सेना, अर्धसैनिक बल अथवा पुलिस के जवान लाते ले जाते हैं। लेकिन उनपर उनका नाम भी दर्ज होता है। ताकि बक्से को आसानी से पहचाना जा सके। कुली द्वारा ले जाए जा रहे बक्से पर कोई नाम ना लिखा होने पर पुलिस कर्मियों ने शक के आधार पर यात्री को रोक उससे पूछताछ की।

रेलवे पुलिस ने एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है जो अपने आप को आरपीएफ का कांस्टेबल बता रहा था। हालांकि जांच में उसकी आइडी फर्जी निकली और उसके पास से काफी गांजा बरामद हुआ।

आरोपित रोहित कुमार ने खुद को आरपीएफ का कांस्टेबल बताया। उसने इलाहाबाद से जारी किया पहचान पत्र भी दिखाया। संतुष्ट नहीं होने पर पुलिस ने यात्रा के बारे जानकारी लेने पर रोहित ने बताया कि स्थानांतरण होने पर वह ग्वालियर जा रहा है। लेकिन, उसके पास टिकट विपरीत दिशा में जा रही ट्रेन का मिला।

लिहाजा बक्से और बैग को खोला गया तो उनसे कुल 35 पैकेट में भरा गांजा बरामद हुआ। जिसके बाद तस्कर रोहित कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में उसने बताया कि वह आंध्र प्रदेश के तस्कर गिरोह का सदस्य है और विशाखापट्टनम से गांजा लाकर गत डेढ़ वर्ष से उसकी आपूर्ति दिल्ली-एनसीआर सहित देश के अन्य हिस्सों में कर रहा था। रोहित कुमार विज्ञान में स्नातक है और वह मथुरा रिफाइनरी में काम कर चुका है। वर्ष 2018 में वह एक निजी कंपनी के साथ जुड़कर ट्रेन अटेंडेंट के रूप में काम करना शुरू किया था। उस दौरान उसकी ड्यूटी आंध्रा एक्सप्रेस, जम्मू राजधानी और डिब्रूगढ़ राजधानी में थी। तभी वह तस्कर गिरोह के संपर्क में आया था।