लेबर यूनियन अध्यक्ष की हत्या में 21 साल से फरार भगोड़ा गिरफ्तार

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दिल्ली में हत्या की वारदात को अंजाम देकर 21 साल से फरार एक वांटेड हत्यारोपी को कोलकाता से दबोचने में क्राइम ब्रांच की स्टार वन टीम ने बहुत बड़ी सफलता हासिल की है। वर्ष 2001 में ग्रुप फोर सिक्योरिटी में गार्डों की सैलरी बढ़ाने को लेकर ओखला में बैठक हुई थी। मीटिंग में मजदूर संघ उपाध्यक्ष राजकुमार ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर सीआईटीयू के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह व सुरक्षा गार्ड अनिल की पिटाई कर दी थी। राजेंद्र की अस्पताल में मौत हो गई थी। अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी 47 वर्षीय राजकुमार 21 साल से अपनी पहचान छुपाकर कोलकाता में छिपकर रह रहा था।
क्राइम ब्रांच डीसीपी राजेश देव के नेतृत्व में क्राइम ब्राँच की अलग अलग यूनिटें दिल्ली एनसीआर में heinous cases में फरार criminals को दबोचने के काम में लगी हुई हैं।
क्राइम ब्रांच डीसीपी राजेश देव ने बताया की क्राइम ब्रांच स्टार वन के एसीपी संतोष कुमार की सुपरविजन में इंस्पेक्टर नरेश सोलंकी की टीम थाना Okhla Industrial Area में दर्ज एक हत्याकांड में शामिल 21 साल से फरार वांटेड क्रिमिनल 47 वर्षीय राजकुमार पुत्र राम निहोरा सिंह निवासी ग्राम नारायणपुर, थाना ताजपुर, समस्तीपुर बिहार पर काफी समय से नजर रखे हुई थी। आरोपी को दबोचने के लिए इंस्पेक्टर नरेश सोलंकी की टीम ने राजकुमार के स्थाई पता समस्तीपुर बिहार में कई बार छापेमारी की लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। इंस्पेक्टर नरेश सोलंकी की टीम को जाँच में पता चला की दिल्ली में हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद से ही आरोपी राजकुमार कहीं ओर अपनी पहचान छिपाकर रह रहा है और अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने अपने पुराने सभी मोबाइल फ़ोन भी बंद कर दिए हैं।
आरोपी राजकुमार को दबोचना इंस्पेक्टर नरेश सोलंकी की टीम के लिए बड़ी चुनौती थी। क्योंकि आरोपी कई बर्षो से न तो अपने परिवार के किसी भी सदस्य के संपर्क में था और न ही अपने पैतृक गांव आ जा रहा था।
समस्तीपुर बिहार में आरोपी का पूरा परिवार था इंस्पेक्टर नरेश सोलंकी को पूरा भरोसा था की आरोपी कभी न कभी तो अपने परिवार से संपर्क जरूर करेगा इसलिए समस्तीपुर बिहार में आरोपी के परिवार के चारो तरफ मुखबिरों का जाल बिछा दिया। आरोपी पर काफी वर्षों तक नजर रखने के बाद आख़िरकार टीम के हाथ सफलता लग ही गई। टीम को मुखबिरों से इनफार्मेशन मिली की आरोपी राजकुमार समस्तीपुर बिहार में किसी से मिलने आया था।
इनफार्मेशन मिलते ही इंस्पेक्टर नरेश सोलंकी की टीम समस्तीपुर बिहार के लिए रवाना हो गई। समस्तीपुर बिहार में आरोपी के परिवार से पूछताछ में टीम को पता चला की आरोपी राजकुमार 21 वर्षों के बाद गांव में आया तो था लेकिन कुछ देर बाद चला भी गया। पूछताछ में टीम को यह भी पता चला की आरोपी के हाथ में मोबाइल फ़ोन भी था लेकिन आरोपी किसी को अपना मोबाइल नंबर देके नहीं गया और यह भी नहीं बताया की किधर रहा हैं।
इंस्पेक्टर नरेश सोलंकी की टीम ने हार नहीं मानी। जितने समय पर आरोपी अपने गांव में आया था उतने समय का टीम ने मोबाइल डम्ब डाटा निकाला । डम्ब डाटा स्कैन करने पर टीम को कोलकाता का एक सस्पेक्ट मोबाइल नंबर मिला।
जोकि काफी समय से कोलकाता में एक्टिव था। टीम ने सस्पेक्ट मोबाइल नंबर की ट्रैवल हिस्ट्री खंगाली तो कोलकाता से समस्तीपुर बिहार और समस्तीपुर बिहार से कोलकाता दिखाई दी।
टीम ने technical surveillance से सस्पेक्ट मोबाइल नंबर पर नजर रखनी शुरू कर दी। टीम के कांस्टेबल सूर्या देव की कोलकाता, पश्चिम बंगाल में अच्छी पकड़ है। कांस्टेबल सूर्या को अपने सूत्रों से पता चला की आरोपी राजकुमार कोलकाता, पश्चिम बंगाल में छिपा हुआ है।
इंस्पेक्टर नरेश सोलंकी ने कांस्टेबल सूर्या देव को मिली इनफार्मेशन को संतोष कुमार एसीपी क्राइम ब्रांच स्टार वन के साथ shared की।
आरोपी राजकुमार के बारे में इनफार्मेशन मिलते ही आरोपी को दबोचने के लिए क्राइम ब्रांच डीसीपी राजेश देव ने संतोष कुमार एसीपी क्राइम ब्रांच स्टार वन की supervision व इंस्पेक्टर नरेश सोलंकी के नेतृत्व में एसआई सम्राट, एसआई कृष्ण कुमार, एसआई उदयवीर सिंह, हेड कांस्टेबल सुधीर और कांस्टेबल सूर्य देव की एक टीम का गठन किया।
आरोपी राजकुमार को दबोचने के लिए टीम कोलकाता, पश्चिम बंगाल के लिए रवाना हुई। दिनांक आठ फरवरी 2022 को टीम ने मोबाइल से आरोपी की पिनपॉइंट लोकेशन ट्रैक करके रात लगभग आठ बजे बुराई रोड, रैना, अरबिंदो नगर, कोलकाता, पश्चिम बंगाल में जाल बिछाया और सस्पेक्ट आरोपी को दबोच लिया।
आरोपी की पहचान 47 वर्षीय राजकुमार पुत्र राम निहोरा सिंह निवासी ग्राम नारायणपुर, थाना ताजपुर, समस्तीपुर बिहार के रूप में हुई।
आरोपी ने पूछताछ में बताया की वारदात वाले दिन गिरफ्तारी से बचने के लिए मौके से फरार हो गया था। दिल्ली से भागकर कर्नाटक के बंगलुरु में छिपकर एक इंजीनियर के पास ड्राइवर की नौकरी की। 2010 तक बेंगलुरु में रहा। बाद में समस्तीपुर बिहार अपने पैतृक गांव से काफी दूर कांटेक्ट पर खेती शुरू की और ड्राइवर के रूप में भी काम किया। आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए हर थोड़े समय के बाद अपना ठिकाना बदल देता था और हमेशा अपनी असली पहचान छिपाकर रखता था। आरोपी अपनी पहचान छुपाकर वर्ष 2011 में कोलकाता पश्चिम बंगाल में शिफ्ट हो गया और अपना जीवन यापन करने के लिए ड्राइवर के रूप में काम करने लगा। आरोपी राजकुमार ने बताया की मामले को बीस साल हो गये थे और उसे लगता था की पुलिस ने अब तक मामला बंद कर दिया होगा इसी धोखे में अपने पैतृक गांव समस्तीपुर बिहार चला गया था।
 
क्राइम ब्रांच डीसीपी राजेश देव ने बताया की आरोपी राजकुमार 47 साल का है और उसने 12वीं तक पढ़ाई की है, इसके चार भाई और दो बहनें हैं और यह 12वीं और 10वीं में पढ़ने वाले दो बेटों का पिता हैं। यह बिहार के समस्तीपुर में खेती बाड़ी करता था। बाद में वह नौकरी की तलाश में दिल्ली आ गया। आरोपी राजकुमार ने वर्ष 1995 में ग्रुप फोर सिक्यूरिटी टास्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेट में बतौर गार्ड नौकरी करना शुरू किया था। आरोपी ने ग्रुप फोर सिक्यूरिटी में छह वर्ष नौकरी की थी साथ ही आरोपी मजदूर संघ का उपाध्यक्ष भी था और उस समय एमके सिंह अध्यक्ष था। आरोपी राजकुमार ग्रुप फोर सिक्यूरिटी के गार्डों की सैलरी बढ़वाना चहाता था। वहीं मजदूरों की दूसरी यूनियन सीआईटीयू गार्डों की सैलरी बढ़ाने के पक्ष में नहीं थी।
इस मुद्दे को हल करने को लेकर ग्रुप फोर सिक्यूरिटी टास्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेट कंपनी के पदाधिकारियों के साथ दोनों यूनियन की 12 मार्च, 2001 को ओखला उषा हाउस में बैठक हुई थी। मीटिंग में राजकुमार, अध्यक्ष एमके सिंह व अन्य ने सीआईटीयू के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह व सुरक्षा गार्ड अनिल की पिटाई कर दी थी।
राजेंद्र की अस्पताल में मौत हो गई थी।
घायल अनिल की शिकायत पर थाना ओखला औद्योगिक क्षेत्र में दिनांक 12 मार्च 2001 को एफआईआर संख्या 143/01 अंडर सेक्शन 147/148/308/302 तहत मामला दर्ज किया गया था।
आरोपी राजकुमार अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए मौके से भाग गया था।
पुलिस ने हत्या का मामला दर्जकर उस समय भगवान ठाकुर, अवधेश और मोहम्मद सलीम को तब गिरफ्तार कर लिया था। तीनों को सजा हो चुकी है। बचे सात आरोपियों को कोर्ट ने एक मार्च, 2002 को भगोड़ा घोषित कर दिया था। इस मामले में घोषित चार भगोड़े अपराधी शिवाजी पांडे, मधुरेंद्र सिंह, सुनील कुमार और जय प्रकाश यादव को इस मामले में बाद में गिरफ्तार किया गया है और उन पर धारा 147/148/149/174/302/308 का मुकदमा चल रहा है।
 
सनसनी ऑफ़ इंडिया नेटवर्क