यूट्यूब से सीखा था कोरोना की फर्जी रिपोर्ट बनाना, साइबर पुलिस ने दबोचा

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विजय कुमार दिवाकर
साइबर थाना पुलिस ने कोरोना जांच की फर्जी आरटीपीसीआर रिपोर्ट बनाने वाले एक गैंग का पर्दाफाश कर दो आरोपियों को धर दबोचा है। आरोपी एक हजार रुपये में फर्जी आरटीपीसीआर रिपोर्ट बनाते थे। मामले का खुलासा तब हुआ जब एक कंपनी के कर्मचारी ने कोरोना जांच की पोस्टिव आरटीपीसीआर रिपोर्ट जमा कराकर मेडिकल प्रॉफिट लेने की कोशिश की। जिस लैब की रिपोर्ट कर्मचारी ने जमा करवाई थी कंपनी ने उसी लैब में रिपोर्ट वेरिफाई करने के लिए भेज दी तो चौकाने वाली बात सामने आई की उनकी लैब के नाम पर यह झूठी रिपोर्ट है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बाटला हाउस निवासी 32 वर्षीय आमिर अंसारी और जाकिर नगर निवासी 25 वर्षीय मोहम्मद अनस के रूप में हुई है।

दक्षिण जिला डीसीपी बेनीटा मेरी जैकर ने बताया कि दक्षिण जिला साइबर सेल थाना प्रभारी अरुण कुमार वर्मा को कोरोना जांच की फर्जी आरटीपीसीआर रिपोर्ट की एक शिकायत मिली थी। शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में लिखा था की वो 1513, फर्स्ट फ्लोर, गुमान पूरी काम्प्लेक्स, वज़ीर नगर, बिष्मा पितामह मार्ग, कोटला मुबारकपुर में labassure नामसे डायग्नोस्टिक लैब चलाता है और उसकी लैब में आरटीपीसीआर टेस्ट भी किए जाते हैं। उसे verification के लिए एक आरटीपीसीआर टेस्ट रिपोर्ट प्राप्त हुई थी। देखने में रिपोर्ट उसकी लैब की लग रही थी। verification करने पर रिपोर्ट फर्जी निकली। यह रिपोर्ट उसकी लैब के नाम का इस्तेमाल कर बनाई गई थी। उसने आगे आरोप लगाया कि कुछ अज्ञात व्यक्तियों द्वारा उसकी लैब के नाम पर झूठी आरटीपीसीआर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। दक्षिण जिले के साइबर थाना प्रभारी अर्जुन कुमार वर्मा ने तुरंत ही एफआईआर संख्या 09/2022 अंडर सेक्शन 420/468/471 के तहत मामला दर्जकर जाँच शुरू कर दी।

अपराध की गंभीरता को भांपते हुए दक्षिण जिला डीसीपी बेनीटा मेरी जैकर ने साइबर थाना प्रभारी अर्जुन कुमार वर्मा के नेतृत्व में एसआई अनिल राठोड, एएसआई सुरेंदर, हैड कांस्टेबल अजय पासवान, कांस्टेबल अभय, राजपाल, अनूप, रामबाबू व महिला कांस्टेबल रेनू की एक टीम का गठन किया।

टीम ने सबसे पहले labassure के नामपे बनी फर्जी रिपोर्ट की जाँच की तो पाया की शातिर ठगों ने labassure के क्यूआर कोड और वेबसाइट डोमेन में भी धोखाधड़ी की हुई है।

जाँच टीम को फर्जी रिपोर्ट बनाने वाले आरोपियों का न तो नाम पता था और न ही किसी प्रकार की कोई पहचान थी। आरोपियों तक पहुंचने का एक ही जरिया था, वो था नकली रिपोर्ट बनबाने वाला कर्मचारी। फर्जी रिपोर्ट बनबाने वाले कर्मचारी का मोबाइल नंबर रिपोर्ट में लिखा हुआ था। आरोपियों तक पहुँचने के लिए साइबर थाना प्रभारी अर्जुन कुमार वर्मा ने सबसे पहले फर्जी रिपोर्ट बनबाने वाले कर्मचारी को पूछताछ के लिए बुलाया।

कर्मचारी से कोरोना की फर्जी आरटीपीसीआर रिपोर्ट बनाने वाले मास्टरमाइंड आमिर अंसारी का मोबाइल नंबर मिला। टीम ने मोबाइल सर्विलांस से आमिर अंसारी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने शुरू में पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। सख्ती से पूछताछ करने पर आरोपी ने सच उगल दिया।

आरोपी आमिर अंसारी ने पुलिस को बताया कि वह अपने सहयोगी मोहम्मद अनस के साथ मिलकर फर्जी आरटीपीसीआर टेस्ट की रिपोर्ट तैयार करता था। इसके बाद पुलिस ने मोहम्मद अनस को भी गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में बताया की मास्टरमाइंड आमिर अंसारी नकली आरटीपीसीआर टेस्ट रिपोर्ट का मसौदा तैयार करता था और ग्राहकों की डिमांड के अनुसार कोरोना की positive या negative रिपोर्ट बनाकर देता था। इसकी एवज में वह एक हजार रुपये रिपोर्ट का लेता था।

पुलिस को जाँच में पता चला की मास्टरमाइंड आरोपी आमिर अंसारी बड़े ही शातिराना अंदाज से फर्जी रिपोर्ट के धंधे को अंजाम दे रहा था। आरोपी सबसे पहले कस्टमर की रिपोर्ट को टेस्ट के लिए लैब में भेजता था। रिपोर्ट को पीडीएफ फॉर्मेट में डाउनलोड करने के बाद वह लैब की मूल रिपोर्ट को वर्ड डॉक्यूमेंट में बदल लेता था। फिर कस्टमर की डिमांड के अनुसार रिपोर्ट में कोरोना positive या negative एडिट कर एक क्यू आर कोड संलग्न करता था।

मास्टरमाइंड आरोपी आमिर अंसारी ने बताया की उसने यह सब कुछ यूट्यूब से सीखा है । आरोपी की निशानदेही पर जो आर्डर लेता था उसे भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. फिलहाल पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है.

सनसनी ऑफ़ इंडिया नेटवर्क