चीफ मेट्रोपोलिटन मैजिस्ट्रेट पुरषोत्तम पाठक ने 1 सितंबर के अपने संबंधित आदेश में कहा, ‘चार्जशीट और उससे जुड़े दस्तावेजों को देखने और विशेष सरकारी वकील को सुनने के बाद, मेरी राय में आरोपियों पर जिन अपराधों के आरोप लगाए गए हैं, उन पर संज्ञान लेने के लिए रिकॉर्ड में पर्याप्त साक्ष्य हैं।’

सनसनी ऑफ़ इंडिया नेटवर्क
नई दिल्ली । ‘पहली नजर में चार्जशीट से जाहिर है कि 24 फरवरी, 2020 को हुए दंगे सोच समझकर रची गई साजिश का नतीजा थे, जिसमें एक पुलिस अधिकारी की हत्या कर दी गई और कई पुलिस अधिकारी और आम लोग जख्मी हुए। कई संपत्तियों को आग लगा दी गई, उन्हें तहस-नहस कर दिया गया। आरोपियों ने साजिश के तहत समान इरादे और गैरकानूनी मकसद से दंगा, हत्या और वे अपराध, जिनके उन पर आरोप लगे हैं, उन्हें अंजाम देने का ढंग तैयार किया और 24 फरवरी को चांद बाग में गैरकानूनी रूप से भीड़ को जमा करने के पीछे इन्हीं की अहम भूमिका थी। इसके बाद वह भीड़ दंगाइयों में तब्दील हो गई और दंगा करते हुए उन्होंने पुलिस अधिकारियों के काम में बाधा डाली, जो अपनी ड्यूटी कर रहे थे। इसमें हेड कांस्टेबल रतन लाल की मौत हो गई, कई पुलिस अधिकारी और आम लोग घायल हो गए और कई संपत्तियों को नष्ट कर दिया गया।’ अदालत ने हेड कांस्टेबल रतनलाल की हत्या मामले में दायर चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए यह बात कही, जो इसी साल फरवरी महीने में नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में सीएए को लेकर भड़के साम्प्रदायिक दंगों के दौरान शहीद हो गए थे।

चीफ मेट्रोपोलिटन मैजिस्ट्रेट पुरषोत्तम पाठक ने 1 सितंबर के अपने संबंधित आदेश में कहा, ‘चार्जशीट और उससे जुड़े दस्तावेजों को देखने और विशेष सरकारी वकील को सुनने के बाद, मेरी राय में आरोपियों पर जिन अपराधों के आरोप लगाए गए हैं, उन पर संज्ञान लेने के लिए रिकॉर्ड में पर्याप्त साक्ष्य हैं।’ उन्होंने हालांकि जरूरी मंजूरी न होने की वजह से धारा 153 ए के आरोप पर संज्ञान नहीं लिया। इसके लिए आवेदन दिया जा चुका है, पर मंजूरी कब तक हासिल हो पाएगी, यह अभी तक साफ नहीं है। ऐसे हालात में अदालत का मानना था कि मंजूरी के इंतजार में बेवजह कार्यवाही रोक कर बैठे रहने से वह मकसद पिछड़ जाएगा, जिसके चलते दंगों के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का गठन किया गया।

पुलिस ने मामले में 8 जून को चार्जशीट दायर की थी। इसमें केस के सिलसिले में गिरफ्तार इन 17 लोगों जैसे-मोहम्मद सलीम खान, सलीम मलिक उर्फ मुन्ना, मोहम्मद जलालुद्दीन उर्फ गुड्डू भाई, आरिफ, मोहम्मद अयूब, मोहम्मद यूनुस, मोहम्मद दानिश, शहनवाज, इब्राहिम, फुरकान, बदरुल हसन, नासिर, शाहदाब अहमद, मोहम्मद सादिक उर्फ साहिल, इमरान अंसारी, आदिल और सुवालीन को आरोपी के तौर पर नामजद किया गया। इनके खिलाफ 17 से ज्यादा आरोपों पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने सबूतों, साक्ष्यों, गवाहों के बयान, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डेटा के आधार पर घटना स्थल पर मौजूदगी आदि पर गौर किया। सभी आरोपियों के खिलाफ पेशी का वॉरंट जारी किया गया। साथ ही दस्तावेजों की जांच और केस को सेशन कोर्ट को सौंपे जाने के लिए 10 सितंबर की तारीख तय कर दी गई। 5 सितंबर को अदालत ने संबंधित एफआईआर के तहत ही आरोपी सुलेमान सिद्दिकी उर्फ सलमान सिद्दिकी और रवीश को भगोड़ा घोषित कर दिया। वे कई बार बुलाए जाने के बावजूद अदालत के सामने हाजिर होने में नाकाम रहे थे।