पार्क में लड़की से सेक्सुअल असॉल्ट में नकली पुलिसकर्मी गिरफ्तार

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विजय कुमार दिवाकर
नकली पुलिसकर्मी बनकर पार्क में बैठी लड़की और उसके दोस्त को धमकाकर पैसे ऐठने और लड़की को अकेले में ले जाकर मारने पीटने के साथ sexual assault के ब्लाइंड केस को द्वारका पुलिस ने हार्ड वर्क और इंटेलिजेंस से सुलझाते हुए आरोपी को धर धबोचा है। आरोपी की पहचान छावला निवासी 38 वर्षीय राजेश कुमार के रूप में हुई है। आरोपी सेना में सूबेदार की पोस्ट से रिटायर है और इस समय कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर गुरुग्राम के एक स्पोर्ट्स स्टेडियम में रेसलिंग की कोचिंग दे रहा है।
डीसीपी द्वारका शंकर चौधरी ने बताया की 3 जनवरी को एक शिकायतकर्ता अपनी बेटी के साथ डीसीपी द्वारका ऑफिस में आते है और बताया की उनकी लड़की के साथ किसी पुलिस वाले ने sexual assault किया है। पीड़िता के मुताबिक बीती 28 जनवरी को शाम लगभग 8:30 बजे पीड़िता द्वारका सेक्टर 23 थाना इलाके के एक पार्क में अपने दोस्त के साथ बैठी हुई थी। तभी खाकी कपड़े पहनकर एक शख्स आया और उसने पीड़िता के दोस्त से कहा कि वो गलत काम कर रहे हैं इसलिए उन्हें थाने चलना पड़ेगा। जब लड़की ने इसका विरोध किया तो वो उसके दोस्त का आधार कार्ड चेक करने लगा। इसके बाद उसने पीड़िता के दोस्त की पिटाई की और उससे 11 हज़ार रुपये देने को कहा। जब लड़के ने कहा कि उसके पास नगद पैसा नहीं है तो आरोपी ने कहा कि पास के मॉल से जाकर पैसा निकाल लाओ। इसी बीच आरोपी ने लड़की को थाने ले जाने के बहाने उसके साथ sexual assault किया। नकली पुलिसकर्मी ने पीड़िता पर सेक्स वर्कर होने का आरोप भी लगाया और फिर पीड़िता के दोस्त से 5 हज़ार रुपये भी लिए। पीड़िता ने बताया की वो इस घटना से इतनी घबराई हुई थी कि अपने साथ हुई वारदात की जानकारी किसी को भी बताने से डर रही थी।
पुलिस के मुताबिक शिकायत मिलते ही इस मामले में एफआईआर दर्ज कर तहकीकात शुरू कर दी गई।
लड़की के साथ लूट और sexual assault में किसी पुलिसकर्मी की भूमिका ने पुलिस महकम्मे पर सवालिया निशान खड़े कर दिए। लड़की के साथ sexual assault करने वाले आरोपी को जल्द से जल्द दबोचना और आम जनता का पुलिस महकम्मे के प्रती विश्वास बनाये रखना डीसीपी द्वारका शंकर चौधरी के लिए अपने आप में बहुत बड़ी चुनौती थी।
मामले की गम्भीरता को देखते हुए डीसीपी शंकर चौधरी ने sexual assault blind case को solve करने और आरोपी को जल्द से जल्द दबोचने के लिए कई टीमों का गठन किया।
जाँच टीमों ने सबसे पहले क्राइम सीन के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगाला। क्राइम के समय पार्क और पार्क के आसपास एक्टिव लगभग सवा दो हजार मोबाइल फोनो की कॉल रिकॉर्ड और जीपीएस डाटा को भी बारीकी से स्कैन किया लेकिन कोई सफलता हाथ नहीं लगी।
क्राइम सीन के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेजों को बारीकी से स्कैन करने पर जाँच टीमों को इस मामले में पहली लीड सीसीटीवी फुटेज से मिली जिसमें क्राइम सीन के पास एक सस्पेक्ट अर्टिगा गाड़ी और एक सख्स नजर आया। शाम के समय पार्क के आसपास अँधेरा होने के कारण आरोपित का चेहरा और कार की नंबर प्लेट सीसीटीवी फुटेज में साफ नजर नहीं आ रहे थे। लेकिन फिर भी इस लीड पर काम करते हुए पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की। द्वारका जिले के करीब 600 पुलिस वालों ने तमाम रेहड़ी पटरी वालों और सिक्योरिटी गार्ड्स से आरोपी की गाड़ी और उसकी फोटो दिखाकर उसके बारे में पूछताछ की।
इसी बीच द्वारका नार्थ थाने में तैनात एक कांस्टेबल रितेश ने सीसीटीवी की धुंधली तस्वीर को देखने के बाद बताया कि उसने एक ऐसे ही शख्स को एक वर्ष पहले पार्क के आसपास घूमते हुए देखा था। उस शख्स का हुलिया सीसीटीवी में दिख रहे युवक से मिलता जुलता है। इस दौरान कांस्टेबल रितेश ने शख्स के गाड़ी के लाइसेंस व स्विफ्ट डिजायर कार की आरसी की फोटो भी ली थी। पुलिस टीम ने लाइसेंस पर दिए गए पते पर छापेमारी की तो पता चला की आरोपी कभी इस पते पर किराये के मकान में रहता था लेकिन काफी समय पहले किराये का मकान खाली करके जा चूका है।
आरोपी ने जिस डीलर से गाड़ी खरीदी थी उस डीलर का नाम और पता आरोपी की आरसी से जाँच टीम को मिल गया। दिल्ली पुलिस ने कार डीलर से जब गाड़ी की जानकारी जुटाई तो आरोपी का मोबाइल नंबर मिला जोकि फ़िलहाल बंद था।
जाँच टीम ने आरोपी के बंद मोबाइल के पिछले एक साल की कॉल रिकॉर्ड खंगाली तो पता चला कि वह अपने एक दोस्त से काफी ज्यादा बातचीत करता है। पुलिस टीम ने इस दोस्त को पकड़ा जिसने उन्हें राजेश का घर दिखाया। पुलिस टीम शख्स के घर पहुंची, वहां सस्पेक्ट अर्टिगा कार खड़ी थी। पुलिस ने कार मालिक राजेश को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने नकली पुलिसकर्मी बनकर वारदात को अंजाम देने की बात कबूल कर ली और बताया कि उसने हाल ही में स्विफ्ट कार के बदले अर्टिगा कार ली है। पुलिस ने आरोपी के पास से कार के साथ ही खाकी पैंट और उसका मोबाइल फोन बरामद किया है।
आरोपी की पहचान छावला निवासी 38 वर्षीय राजेश कुमार पुत्र ताराचंद के रूप में हुई है। आरोपी स्पोर्ट्स कोटे के जरिये सेना में भर्ती हुआ था और सूबेदार के पद से दो साल पहले ही रिटायर हुआ है। रिटायरमेंट के बाद राजेश कुमार हरियाणा के एक स्टेडियम में रेसलिंग की कोचिंग देने लगा था।
सनसनी ऑफ़ इंडिया नेटवर्क