सनसनी ऑफ़ इंडिया नेटवर्क
नई दिल्ली/आगरा। रेंज साइबर सेल ने ठगों के ऐसे गिरोह को पकड़ा है जिसने दस साल में दस हजार से ज्यादा लोगों से लगभग 250 करोड़ की ठगी की है। इसकी जानकारी गिरोह के सदस्य के लैपटॉप से मिली है।
यह नाइजीरियन गैंग है जिसके सदस्य फेसबुक पर विदेशी महिला मित्र बनकर और गूगल पर बीमा कंपनियों की फर्जी वेबसाइट बनाकर ठगी करते हैं। आगरा के पूर्व फौजी प्रताप सिंह से 1.32 करोड़ रुपये ठग लिए थे। गिरोह का सरगना जॉन स्टेनले अभी पुलिस के हाथ नहीं आया है।
गिरोह ने उत्तर प्रदेश, दिल्ली, झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश के लोगों के साथ ठगी की है। गिरोह के  गिरफ्तार चार सदस्यों में एक नाइजीरियन, जबकि तीन भारतीय हैं। आईजी ए सतीश गणेश ने बताया कि वेस्ट अर्जुन नगर स्थित लक्ष्मण नगर निवासी प्रताप सिंह को बीमा पॉलिसी का पैसा वापस दिलाने के नाम पर नाइजीरियन गैंग ने उनसे अपने खातों में 1.34 करोड़ रुपये जमा करा लिए गए थे। उन्होंने रेंज साइबर सेल में शिकायत की। इस पर जांच की गई। इसमें यह खुलासा हुआ।

फर्जी वेबसाइट और फेसबुक पर फर्जी आईडी बनाकर लोगों से 10 साल में 250 करोड़ की ठगी करने वाले नाइजीरियन गैंग ने फर्जी दस्तावेजों की मदद से 40 खाते खुलवाए थे। रेंज साइबर सेल की जांच में यह सामने आया है। यह सभी निजी बैंकों में खोले गए थे। एक साल पहले गुजरात में लोगों से धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने 15 खातों को होल्ड भी कराया था, लेकिन खातों में फर्जी दस्तावेज लगाए जाने के कारण पुलिस गैंग को नहीं पकड़ सकी।

आगरा रेंज साइबर सेल की टीम ने बुधवार को नाईजीरियन गैंग के सदस्य गुड्स टाइम संडे उर्फ बेंशन, गाजियाबाद निवासी तरुण यादव, संभल निवासी आसिफ और जसपाल को गिरफ्तार किया था। गुड्स टाइम संडे सहित अन्य के पास से पुलिस ने 75 बैंक पासबुक बरामद की थीं।
इन पासबुक में करोड़ों के लेन-देन की जानकारी है। अब पुलिस इन बैंकों से खातों को होल्ड कराकर पिछले सालों में हुए लेन-देन के बारे में पड़ताल करने में लगी है। एक आरोपी की 15 आईडी पुलिस को मिली थी। इनकी मदद से आरोपी ने खाते खुलवाए थे। गैंग के सरगना सहित अन्य आरोपियों की पुलिस तलाश कर रही है।

सरकारी और निजी बैंकों में खोले खाते 
रेंज साइबर सेल के मुताबिक, गैंग ने खाते उत्तर प्रदेश के संभल, मुरादाबाद, गोरखपुर और बिहार के जिलों की बैंकों में खोले थे। इन जिलों की ही पासबुक पुलिस को मिली हैं। बैंकों में भी भारतीय स्टेट बैंक के अलावा देना बैंक, आईसीआईसीआई, एचडीएफसी, आईडीबीआई आदि बैंक शामिल हैं।  इनमें से 40 खातों के फर्जी दस्तावेज से खोले जाने की जानकरी मिली है। इस वजह से ही धोखाधड़ी होने के बाद पुलिस गैंग को नहीं पकड़ पा रही थी।

नहीं पकड़ पाई थी गुजरात पुलिस  
रेंज साइबर सेल के मुताबिक, गुजरात में लाखों की धोखाधड़ी के मामले में वहां की साइबर सेल जांच में लगी थी। तब 15 खातों की जानकारी साइबर सेल को लगी थी। इनमें रकम जमा की गई थी। पुलिस ने बैंकों से संपर्क करके खातों को होल्ड करा दिया था। इन खातों में फर्जी दस्तावेज लगाए गए थे।
किसी में पहचानपत्र तो किसी में पते का प्रमाणपत्र गलत था। इस कारण पुलिस आरोपियों तक नहीं पहुंच सकी थी। गिरफ्त में आए आरोपियों ने बताया कि पूर्व में एक राज्य की पुलिस ने पकड़ भी लिया था। मगर, कोई साक्ष्य नहीं थे। इस कारण कोई कार्रवाई नहीं की थी। इस पर सदस्यों को छोड़ दिया गया।

साइबर रेंज थाना ने पकड़ा गैंग

इंटरनेशनल खातों में सरगना जमा कराता हैं रकम 
रेंज साइबर सेल की पूछताछ में आरोपी गुड्स टाइम संडे ने बताया कि सरगना स्टेनले ने खाते खुलवाने के बाद सदस्यों को एटीएम कार्ड दे रखे थे। खातों में रकम जमा होने के आधा घंटे के अंदर एटीएम कार्ड की मदद से खातों से रकम निकाल ली जाती है। इसके बाद सरगना रकम कैश में लेता था। सरगना ने एक इंटरनेशनल खाता खोल रखा है। इसकी मदद से रकम को अपने देश भेज देता है।
खातों में रकम एटीएम से जमा करता था, जिससे बैंक नहीं जाना पड़े। इसमें पकड़े जाने का भी डर नहीं रहता है। आरोपी गुड्स टाइम संडे के लैपटॉप में इंटरनेशनल खाते का एक ईमेल मिला है, जिसमें रकम ट्रांसफर होने की जानकारी भी है। अब पुलिस का अनुमान है कि सरगना के पास ऐसे कई मेल होंगे।

खातों में जमा रकम को होल्ड कराएगी पुलिस 
गैंग के सदस्यों से 75 पासबुक पुलिस को मिली हैं। पुलिस अब बैंकों से संपर्क कर कर रही है, जिससे इन खातों को होल्ड कराया जा सके। रेंज साइबर सेल का कहना है कि जिन खातों की मदद से आरोपियों ने धोखाधड़ी की है, यह केस प्रॉपर्टी बन गए हैं। इसलिए बैंकों को ईमेल भेजकर निवेदन किया जाएगा कि इनका लेनदेन रोका जाए। पैसे को होल्ड कर दिया जाए।

पहले पॉलिसी के नाम पर ठगा, फिर रकम दिलाने के
वेस्ट अर्जुन नगर स्थित लक्ष्मण नगर निवासी प्रताप सिंह की वर्ष 2015 में एक बीमा एजेंट ने बीमा पालिसी की थीं। उनको पालिसी बांड भी भेजे। यह सब फोन पर और ऑनलाइन हुआ था। 30 लाख प्रीमियम देने के बाद बंद कर दिया। उन्हें मालूम नहीं था कि यह पॉलिसी फर्जी है, पैसा नाइजीरियन गैंग के खाते में गया है। थोड़े दिन बाद जमा रकम को वापस लेने के लिए प्रताप सिंह ने बीमा कंपनियों की वेबसाइट सर्च करना शुरू कर दिया। मार्च 2017 में उनके पास एक कॉल आया। कॉल करने वालों ने अपना नाम जगदीश नेगी और राजीव शुक्ला बताए। खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। कहा कि आपके साथ धोखाधड़ी हुई है।

पालिसी फर्जी थीं। गैंग को हमने पकड़ा है। बाद में बताया कि सभी पालिसियों का पैसा वापस करा दिया जाएगा। रकम पांच करोड़ की बताई। लालच दिया कि इनका बचा हुआ प्रीमियम देने पर यह पूरी रकम खातों में भेज दी जाएगी। उनसे 95 लाख रुपये जमा करा लिए। इसके बाद प्रताप सिंह का नंबर ब्लाक कर दिया।

इनकी हुई गिरफ्तारी
गुड्स टाइम संडे उर्फ बेंशन निवासी रावारी कालोनी पाठाकोट, रोइवर स्टेट, नाइजीरिया। हाल पता स्ट्रीट फ्लैट नंबर 30 फर्स्ट फ्लोर वाटिका मानेसर रोड, सेक्टर 82/83 गुरुग्राम। तरुण यादव निवासी सेक्टर एक, वसुंधरा, गाजियाबाद। आसिफ निवासी महमूद नगर, अकबरपुर गहरा, थाना असमौली, संभल। जसपाल निवासी नवाबपुरा, भूलेश्वर, थाना नखाशा, संभल हैं।

ये हैं फरार: जॉन स्टेनले निवासी नाइजीरिया हाल पता नई दिल्ली (सरगना), डिक्सन उर्फ स्मॉल   वीटा इनलॉ, फ्रांसिस, स्टाइलिश बैंशन निवासी नई दिल्ली।

यह हुई बरामदगी
तीन लैपटॉप, पीओएस स्वैप मशीन, 24 मोबाइल, 75 बैंक पासबुक, 40 एटीएम कार्ड, 24 चेकबुक, तीन इंटरनेट डिवाइस, दो हाईपावर हार्ड डिस्क, तरुण यादव के 14 आईडी, एक डायरी (जिस पर सैकड़ों खाता धारकों का विवरण है)। लैपटॉप में कई साफ्टवेयर अपलोड हैं, जिनके बारे में रेंज साइबर सेल की टीम जानकारी जुटा रही है।