मेट्रो कार्ड से क्राइम ब्रांच ने कातिल को दबोचा

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विजय कुमार दिवाकर
सिविल लाइंस में बिल्डर राम किशोर अग्रवाल की हत्या व लूट के ब्लाइंड मामले को क्राईम ब्रांच एंटी रोब्बरी एंड स्नेचिंग सेल शकरपुर की टीम ने लगभग 300 सीसीटीवी कैमरे और आरोपी के मेट्रो कार्ड की मदद से सुलझा लिया है। वायरल हुए सीसीटीवी वीडियो में आरोपी अपने साथी के साथ अग्रवाल के घर की दीवार को फांदते हुए नजर आया था। पुलिस इस आरोपी तक कैसे पहुंची, इसकी कहानी बड़ी दिलचस्प है। और इसमें दिल्ली मेट्रो के स्मार्ट कार्ड की अहम भूमिका रही। हत्याकांड की साजिश अग्रवाल के यहां दो साल पहले घरेलू सहायक रह चुके एक नाबालिग ने अपने दोस्त के साथ मिलकर रची थी। उसने अग्रवाल की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी, क्योंकि 20 हजार रुपये चोरी करने के आरोप में रामकिशोर अग्रवाल ने उसे नौकरी से निकाल दिया था। लेकिन आरोपी का कहना है कि चोरी का झूठा आरोप लगाकर उसे बिल्डर ने निकाला था।

इसी बात को लेकर आरोपी ने मन में रंजिश पाल ली थी। साथ में उसे पता था कि पीड़ित के पास काफी नकदी रहती है। इसलिए, वह पिछले 2 वर्षों से घर लूटने और अमीर बनने की योजना बना रहा था। हत्याकांड में पकड़े गए दोनों नाबालिक बिहार के मधुबनी जिले के रहने वाले हैं। इसमें एक के पिता बिल्डर की गाड़ी चलाते थे। नाबालिक के पढ़ाई लिखाई न करने पर उन्होंने ही बेटे को घरेलू सहायक के रूप में रखवा दिया था।

रविंदर सिंह यादव, स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस, क्राइम ने बताया की दिनांक एक मई 2022 को सुबह लगभग 6 बजकर 10 मिनट पर हाउस नंबर 1, राम किशोर मार्ग, सिविल लाइंस में 77 वर्षीय राम किशोर अग्रवाल खून से लथपथ अपने बिस्तर पर पड़े मिले थे। उन्हें तुरंत ट्रॉमा सेंटर, सिविल लाइंस, दिल्ली ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। मृतक के कमरे से कुछ गत्ते के डिब्बे भी गायब मिले जिनमें नकदी थी। सुरक्षा गार्डों में से एक ने सुबह करीब 6 बजकर 5 मिनट पर दो लोगों को मृतक के घर से भागते हुए देखा। जब सुरक्षा गार्ड ने चोर चोर चिल्लाया, तो उसे पिस्टल से धमकाया गया। तुरंत ही एफआईआर संख्या 227/22 धारा 302/397/34 के तहत मामला दर्ज किया गया और जांच शुरू की गई। जाँच टीम को मौके से सब्जी काटने वाला एक चाकू और एक मोटरसाइकिल का हेलमेट भी मिला था। और एक सीसीटीवी फुटेज में दो व्यक्ति अग्रवाल के घर की दीवार को फांदते हुए नजर आये थे।

नृशंस हत्या और लूट की गुत्थी को जल्द से जल्द सुलझाने और आरोपियों को दबोचने के लिए कई टीमों का गठन किया गया।

जांच टीमों ने सबसे पहले परिवार के सभी सदस्यों, नौकरों, सोसाइटी के गार्ड से लंबी पूछताछ की। क्राइम सीन से जाँच टीमों को इतना तो साफ हो गया था की वारदात को अंजाम किसी ऐसे व्यक्ति ने दिया है जिसको सोसाइटी के सभी रास्तों और कोठी के अन्दर और बाहर के चप्पे चप्पे की अच्छी जानकारी है। स्टाफ और आसपास के लोगों से पूछताछ के अलावा एक टेक्निकल टीम पूरे इलाके और आसपास के सीसीटीवी फुटेज को खंगाले में लगी हुई थी।

मामले को जल्द से जल्द सुलझाने के लिए एसडी मिश्रा एडिशनल सीपी क्राइम और रोहित मीणा डीसीपी क्राइम की सुपरविजन व अरविन्द कुमार एसीपी क्राईम ब्रांच एंटी रोब्बरी एंड स्नेचिंग सेल शकरपुर के नेतृत्व में इंस्पेक्टर अरुण सिंधु, एसआई राजकुमार, एएसआई चंद्रप्रकाश सुभाष, रविंदर, प्रमोद, हेड कांस्टेबल गौरव त्यागी, शशिकांत, जितेंदर,
अनंगपाल, दीपचंद, नरेंद्र, अनुज, कुलदीप, शशिकांत, कांस्टेबल सुरेंद्र, परमिंदर और अरविंद की एक टीम का गठन किया गया।

इंस्पेक्टर अरुण सिंधु की टीम ने क्राईम सीन से लेकर सोसाइटी में आने जाने वाले सभी रूटों के सीसीटीवी फुटेजों को बारिकी से स्कैन किया। टीम ने वारदात से कुछ दिन पहले के भी सीसीटीवी फुटेजों को खंगाला। जिसमे दो सस्पेक्ट क्राईम सीन के आसपास रेकी करते नजर आये। दोनों सस्पेक्टों ने अपना चेहरा ढक रखा था तो इसलिए उनकी पहचान नहीं हो पा रही थी।

टीम को सीसीटीवी फुटेजों से पता चला की आरोपी वारदात से एक दिन पहले भी बाईक से सोसाइटी के अन्दर तो घुसे थे लेकिन बाईक को सोसाइटी के अन्दर ही कहीं खड़ा करके पैदल वापस लौट गये थे। और अगले दिन आरोपी ई रिक्शा से जल्दी सुबह सोसाइटी में आये और वारदात को अंजाम देकर पहले से सोसाइटी के अन्दर खड़ी बाईक से भाग गए।

इंस्पेक्टर अरुण सिंधु की टीम ने वारदात से एक दिन पहले का आरोपी के पैदल लौटने वाले सभी रास्तों पर लगे सीसीटीवी फुटेजो को खंगाला। सीसीटीवी फुटेजों से आरोपी का पीछा करते करते टीम सिविल लाइंस मैट्रो स्टेशन तक पहुंच गई।

टीम ने मैट्रो पुलिस की मदद से सिविल लाइंस मैट्रो स्टेशन के अन्दर लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगाला। सीसीटीवी फुटेज में आरोपी मैट्रो में जाने के लिए अपना मैट्रो कार्ड पंच करते दिखाई दिया।

दिल्ली मेट्रो के सभी मेट्रो कार्ड की यूनीक आईडी होती है। इसकी बदौलत किसी भी मेट्रो स्टेशन से प्रवेश और निकास का समय ऑनलाइन दर्ज होता है।

इंस्पेक्टर अरुण सिंधु की टीम ने मेट्रो पुलिस के स्पेशल स्टाफ की टीम की मदद से आरोपियों के मैट्रो कार्ड की ट्रैवल हिस्ट्री निकलवाई और अलर्ट पर डलवाया ताकि दोबारा इस्तेमाल होने पर उसकी लोकेशन पता चल सके। मैट्रो कार्ड डिटेल से जांच टीम को पता चला की आरोपी आने जाने के लिए मैट्रो का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं।
आरोपी ने 2 मई को मेट्रो में सफर नहीं किया लेकिन 3 मई मंगलवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी मेट्रो स्टेशन पर जैसे ही कार्ड का इस्तेमाल किया, इसकी जानकारी पुलिस को मिल गई।

एंटी रोब्बरी एंड स्नेचिंग सेल शकरपुर की टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए डीएमआरसी स्टाफ की मदद से राजीव चैक मेट्रो स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर संदिग्ध को दबोच लिया।

पूछताछ के दौरान संदिग्ध ने अपने एक साथी के साथ वारदात को अंजाम देने की बात कबूल कर ली। आरोपी की निशानदेही पर उसके दूसरे साथी को गांव मुकुंदपुर दिल्ली से दबोच लिया। आरोपियों के घर की तलाशी के दौरान रुपये से भरा एक बैग जिसमें पीड़ित के घर से लूटे गए 10 लाख 37 हजार नकद, कुछ विदेशी मुद्रा, दो घड़ियां और कुछ गहने बरामद किए गए। इसके अलावा, दोनों आरोपियों के कहने पर, अपराध में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल को भी गांव मुकुंदपुर, दिल्ली के इलाके से बरामद कर लिया गया। लूट की रकम में से 25 हजार दोनों खरीदारी में खर्च कर चुके थे।

जांच में पता चला की दोनों आरोपी नाबालिक है। विशेष पुलिस आयुक्त दीपेंद्र पाठक का कहना है कि पुलिस अदालत से अपील करेगी कि इस मामले में आरोपियों को बालिग मानते हुए उन पर केस चलाया जाए।

पूछताछ में जांच टीम को पता चला कि गिरफ्तार दोनों आरोपियों में से एक के पिता बिल्डर की गाड़ी चलाते थे। नाबालिक के पढ़ाई लिखाई न करने पर उन्होंने ही बेटे को घरेलू सहायक के रूप में पीड़ित के घर रखवा दिया था। हालांकि, करीब तीन माह बाद ही घर में हुई एक चोरी के मामले में नाबालिक का नाम सामने आने पर बिल्डर ने उसे निकाल दिया था। बाद में उसके पिता ने भी नौकरी छोड़ दी थी। गिरफ्तार नाबालिक आरोपी ने पुलिस को बताया कि चोरी का झूठा आरोप लगाकर उसे बिल्डर ने निकाला था। इसलिए उसने उसी दिन बिल्डर की हत्या करने का निर्णय कर लिया था। वहीं महंगे शौक भी पूरे करना चाहता था। इसलिए हत्या के साथ ही लूट की भी साजिश रच डाली। हत्याकांड को अंजाम देने के लिए उसने पहले दिल्ली में ही भरोसेमंद साथी की तलाश की लेकिन कोई दोस्त इसके लिए तैयार नहीं हुआ। इसके बाद उसने अपने पैतृक गांव के रहने वाले बचपन के दोस्त को साजिश में शामिल किया। एक सप्ताह पहले उसे वारदात को अंजाम देने के लिए दिल्ली बुला लिया। उसे रहने के लिए मुकंदपुर में किराये का घर दिलवा दिया। वारदात को अंजाम देने के लिए दोनों ने लाजपत राय मार्केट से एक खिलौना पिस्तौल और चावड़ी बाजार से सब्जी काटने वाले दो चाकू खरीदे।
आरोपियो ने बताया कि हत्याकांड को अंजाम देने के लिए उसने पहले यू ट्यूब पर बिना चाबी के बाइक स्टार्ट करने का तरीका सीखा। इसके बाद उसने साथी के साथ मिलकर 28 अप्रैल को वजीराबाद इलाके से बाइक चोरी की। शनिवार की रात दस बजे बाइक को बिल्डर की कोठी के बाहर खड़ा कर दिया और दोनों मेट्रो से घूमने चले गए। दरअसल, उसे पता था कि सुबह पांच बजे गार्ड बाइक लेकर उसे कालोनी में प्रवेश नहीं करने देगा।

पूछताछ में जांच टीम को पता चला कि घरेलू सहायक के रूप में काम करने की वजह से किशोर को पता था कि शनिवार की रात पार्टी आदि करने की वजह से परिवार के सदस्य सुबह देर तक सोते हैं। वहीं बिल्डर राम किशोर करीब पांच बजे लान में टहलने के लिए दरवाजा खोलेंगे। योजना अनुसार दोनों एक मई की सुबह तड़के कोठी पर आ गए। चारदीवारी से छलांग लगा दोनों परिसर के अंदर घुस गए। गार्ड को एक कमरे में सोते देख दरवाजे की बाहर से कुंडी लगा दी। इसके बाद दोनों राम किशोर अग्रवाल के कमरे में घुस गए। उस समय वह टीवी देख रहे थे। दोनों ने उन्हें दबोचकर गर्दन काट दी और पेट तथा गर्दन पर भी चाकू से वार कर हत्या कर दी। हत्या के बाद दोनों ने लकड़ी की अलमारी खोल उसमें रखी नकदी और जेवर लूट लिए और कोठी के बाहर पहले से खड़ी बाइक लेकर फरार हो गए।

पहला नाबालिक आरोपी बिहार के मधुबनी का रहने वाला है। इसका जन्म और पालन पोषण गांव वजीराबाद, दिल्ली में हुआ है। उसने 9वीं तक पढ़ाई की। उसने अपने पिता की सिफारिश पर मृतक के घर पर 3 महीने तक काम किया।

दूसरा नाबालिक आरोपी भी बिहार के मधुबनी के उसी गांव की रहने वाली है। उन्होंने 10वीं तक की पढ़ाई बिहार बोर्ड से की है। वह नाबालिक आरोपी का बचपन का दोस्त है, जिसने उसे उज्ज्वल भविष्य व जल्दी पैसा कमाने का लालच देकर इस अपराध को करने के लिए राजी किया।

सनसनी ऑफ़ इंडिया नेटवर्क