कातिल की माने तो बिल्डर जुगल को यूं ही मार डाला

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एक कत्ल होता है। कातिल पूरी प्लानिंग के साथ कत्ल को अंजाम देता है। पुलिस कातिल को पकड़ लेती है। कातिल क़त्ल के मकसद को लेकर पुलिस को गुमराह करता रहता है। कत्ल का मकसद जानने के लिए पुलिस आरोपी को कोर्ट से एक नहीं दो दो बार रिमांड पर लेती है। आरोपी उम्रदराज और बिमारियों से ग्रस्त था इस वजह से पुलिस आरोपी को थर्ड डिग्री देने से डर रही थी। फिर भी पुलिस ने आरोपी से अपने स्तर पर कत्ल का मकसद जानने की पूरी कोशिश की लेकिन आरोपी कत्ल के मकसद के नाम पर मनगढ़त कहानिया सुनाता रहा।

मकान नंबर 640, सेक्टर 37 निवासी 67 वर्षीय बिल्डर जुगल किशोर एक जून को अपनी ब्रेजा कार नंबर HR51 AT0444 से घर से निकले थे लेकिन शाम तक नहीं लौटे। अगले दिन लापता बिल्डर जुगल किशोर के बेटे मनोज गोयल ने अपने नजदीकी थाना सराय ख्वाजा में अपने पिता की गुमशुदा की रिपोर्ट दर्ज करवाई। थाना सराय ख्वाजा पुलिस ने बिना देरी किये मुकदमा नंबर 131 धारा 346 के तहत मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी।

मामले की गंभीरता देखते हुए पुलिस आयुक्त ओपी सिंह ने क्राइम ब्रांच डीएलएफ को बिल्डर को तलाश करने की जिम्मेवारी सौंपी जिसके तहत कार्य करते हुए क्राइम ब्रांच डीएलएफ प्रभारी उप निरीक्षक अनिल कुमार के नेतृत्व में इंवेस्टिगेटिंग ऑफिसर एसआई समंदर सिंह, एसआई विजय, नकुल, सुनील और रोशन की एक टीम बनाई।

जाँच अधिकारी समंदर सिंह ने अपनी टीम के साथ मिलकर तुरंत सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल सर्विलांस, कॉल रिकॉर्ड और तकनिकी टेकनोलोजी के साथ मुखबिरों की मदद ली। क्राइम ब्रांच टीम ने लापता बिल्डर जुगल किशोर से जुड़े लगभग सभी लोगो से पूछताछ की।

जाँच के दौरान क्राइम ब्रांच को अशोका एन्क्लेव फरीदाबाद निवासी अजय और महिपालपुर, नई दिल्ली निवासी पीटर उर्फ जोन नामके दो सस्पेक्ट मिले। क्राइम ब्रांच डीएलएफ ने दोनों को हिरासत लेकर पूछताछ की तो बड़ी चौकाने वाली बात सामने आई। आरोपियों ने बिल्डर का अपहरण कर उसकी हत्या करने की बात कबूल की।

पहला आरोपी 60 वर्षीय अजय अशोका एन्क्लेव फरीदाबाद में रहता है और अच्छे परिवार से ताल्लुक रखता है आरोपी की लड़कियां काफी पढ़ी लिखी है और एलएलबी की पढ़ाई कर रही है। आरोपी बिल्डर जुगल किशोर के मकान में 20 साल तक किराए पर रहा था।
दूसरा आरोपी पीटर उर्फ जॉन नई दिल्ली, महिपालपुर का रहने वाला है और नोएडा में प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करता है। आरोपी अजय ने पीटर उर्फ जोन को पैसे का लालच देकर इस क़त्ल में शामिल किया था।

मास्टर माइंड आरोपी अजय ने क्राइम ब्रांच को बताया की किसी डील के चक्कर में बिल्डर का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी है। आरोपी ने बताया की बिल्डर जुगल किशोर की हत्या की योजना उसने पहले से ही बना रखी थी। योजना अनुसार आरोपी अजय ने पैसों का लालच देकर पीटर उर्फ जोन को अपने साथ मिलाया था। पीटर उर्फ जोन बिल्डर जुगल किशोर को पहले से नहीं जानता था।

एक जून को आरोपी अजय अपने साथी पीटर उर्फ जोन के साथ बिल्डर जुगल किशोर को उनकी ब्रेजा कार से ही किसी डील के बाहने मेरठ लेकर गए। मौका मिलते ही अजय के इसारे पर पीटर उर्फ जोन ने बिल्डर जुगल किशोर का मुँह दबा कर हत्या कर दी। हत्या के बाद शव गंग नहर में ठिकाने लगा दिया। शव ठिकाने लगाने के बाद दोनों आरोपी मृतक बिल्डर जुगल किशोर की ब्रेजा कार से ही वापस दिल्ली लौट आये और कार को अमर कॉलोनी में एक इंस्टिट्यूट के पास छिपा दी।

आरोपियों द्वारा दी गई सूचना के आधार पर खतौली थाना प्रबंधक से संपर्क स्थापित करके बिल्डर के शव को बरामद कर लिया। गायब बिल्डर के बेटे मनोज गोयल ने अपने पिता के शव की पहचान कर ली है। आरोपियों के अनुसार उन्होंने हत्या उसी दिन कर दी थी। इसके साथ ही आरोपियों के निशानदेही पर दिल्ली से ब्रेजा कार को भी बरामद कर लिया।

आरोपी अजय द्वारा बताया गया हत्या के मकसद पर क्राइम ब्रांच डीएलएफ को विश्वास नहीं हो रहा था। इसलिए दोनों आरोपियों को अदालत में पेश करके 3 दिन का पुलिस रिमांड माँगा जिसमें मामले में आरोपियों से गहनता से पूछताछ करके हत्या के असली कारणों का पता लगाया जा सके।

आरोपी अजय उम्रदराज और बिमारियों से ग्रस्त था इस वजह से पुलिस आरोपी को थर्ड डिग्री देने से डर रही थी। दूसरा आरोपी पीटर उर्फ जोन पैसे के लिए इस हत्या में शामिल हुआ था उसे इस बात की बिलकुल भी जानकारी नहीं थी की आरोपी अजय बिल्डर जुगल किशोर की हत्या किस वजह से करना चाहता था।

तीन दिन का रिमांड खत्म होने के बाद आरोपियों को फिर से अदालत में पेश किया गया। क्राइम ब्रांच ने आरोपियों से हत्या की असली वजह जानने के लिए अदालत से आरोपियों का दो दिन का और रिमांड माँगा।

इस दो दिन के रिमांड में भी आरोपी अजय हत्या के मकसद पर क्राइम ब्रांच को गुमराह करता रहा। हत्या का मास्टर माइंड अजय ने अभी तक हत्या का कारण स्पष्ट नहीं किया है।

मास्टर माइंड अजय ने हत्या की फुलप्रूफ योजना बना रखी थी। और उसे लगता था की हत्या करने के बाद पुलिस की रडार में नहीं आएगा। लेकिन क्राइम ब्रांच डीएलएफ के तेज तरार प्रभारी उप निरीक्षक अनिल कुमार व इंवेस्टिगेटिंग ऑफिसर एसआई समंदर सिंह की पारखी नजरो से बच न सका।

सनसनी ऑफ़ इंडिया नेटवर्क