सनसनी ऑफ़ इंडिया
दुनिया के सबसे खूंखार आतंकी संगठन आईएसआईएस का सरगना अबू बकर अल बगदादी आखिरकार अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज के हमले में मारा गया। शनिवार की आधी रात सीरिया के इदलिब प्रांत में स्थित बारिशा में हुए ऑपरेशन में बगदादी के आतंक का अंत हो गया। जानिए कैसे एक पीएचडी स्कॉलर और फुटबॉलर दुनिया के सबसे खूंखार आतंकी संगठन का सरगना बना-

बगदादी का जन्म 1971 में इराक के सामरा में गरीब सुन्नी परिवार में हुआ था। उसका असली नाम इब्राहिम अल-ऊद अल-बदरी था, लेकिन दुनिया में उसने अबू बकर अल बगदादी के नाम से खौफ कायम किया था।

बगदादी का परिवार पैगंबर मोहम्मद का वंशज होने का दावा करता है। उनका कहना है कि वे पैगंबर मोहम्मद के कबीले से ताल्लुकात रखते हैं।

बगदादी को बचपन से ही कुरान की आयतें याद थी। उसका इस्लामिक कानून शरिया से गहरा लगाव था। बगदादी अपने रिश्तेदारों पर तेज नजरें बनाएं रखता था कि कहीं भी इस्लामिक कानून का उल्लंघन न हो।

बगदादी ने 1996 में यूनिवर्सिटी ऑफ बगदाद से इस्लामिक स्टडीज में स्नातक की डिग्री पाई। इसके बाद 1999 से 2007 से के बीच कुरान पर इराक की सद्दाम यूनिवर्सिटी फॉर इस्लामिक स्टडीज से मास्टर और पीएचडी की डिग्री हासिल की।

बगदादी को फुटबाल खेलने का बहुत शौक था। वह बगदाद के एक स्थानीय क्लब का स्टार फुटबॉलर भी था। वह 2004 तक बगदाद में अपने परिवार के साथ रहा।

इस दौरान बगदादी हिंसक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप झेल रही मुस्लिम ब्रदरहुड का सदस्य बना। इसके बाद वह जल्द ही हिंसक इस्लामिक मूवमेंट का समर्थन करने लगा।

इस दौरान बगदादी हिंसक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप झेल रही मुस्लिम ब्रदरहुड का सदस्य बना। इसके बाद वह जल्द ही हिंसक इस्लामिक मूवमेंट का समर्थन करने लगा।

जब 2003 में अमेरिका ने सद्दाम को सत्ता से हटाने के लिए इराक पर हमला किया तब बगदादी ने जैश अह्ल अल-सुन्नाह वा अल-जमाह नाम के आतंकी गुट के गठन में सक्रिय भूमिका निभाई।

फरवरी 2004 में अमेरिका ने इराक के फलुजा से बगदादी को गिरफ्तार किया था लेकिन तब उसे यह नहीं पता था कि यही आगे चलकर उसके लिए बड़ा सिरदर्द साबित होगा। बगदादी को बक्का स्थित नजरबंदी शिविर में 10 महीने तक कैद रखा गया। इस दौरान वह कैदियों को इस्लामी तालीम देता था।

दिसंबर 2004 में बगदादी के अच्छे चाल-चलन को देखते हुए कैंप से रिहा कर दिया गया। कैद से आजाद होने के बाद उसने इराक में सक्रिय अल कायदा के प्रवक्ता से बात की।

अल कायदा का प्रवक्ता बगदादी के इस्लामिक ज्ञान से बहुत प्रभावित हुआ। उसी प्रवक्ता ने बगदादी को दमिश्क जाने के लिए राज़ी किया। बगदादी को यहां अल कायदा के प्रॉपेगैंडा को फैलाने की जिम्मेदारी दी गई थी।

अबू अय्यूब अल मासरी ने इस्लामिक स्टेट इन इराक का गठन किया। इस समूह का अल-कायदा से भी संबंध बना रहा।

इस्लामिक ज्ञान के कारण बगदादी ने आईएस के अलग-अलग धड़ों को एकजुट कर लोगों को जोड़ना शुरू किया। इसके बाद उसे शरिया समिति का पर्यवेक्षक बनाया गया। इसके साथ ही उन्हें शूरा काउंसिल के 11 सदस्यों में भी शामिल किया गया।

बाद में बगदादी को आईएस की समन्वय समिति में रखा गया जिसका काम इराक में कमांडरों के बीच संवाद कायम करना था। अप्रैल 2010 में आईएस के संस्थापक के मारे जाने के बाद शूरा काउंसिल ने बगदादी को आईएस का प्रमुख बना दिया।