गली गली घुमकर साड़ी बेचने वालों ने डकैती व लूट की वारदातों से मचा रखा था आतंक

0
विजय कुमार दिवाकर
सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की एएटीएस टीम ने एक ऐसे गैंग का भांडाफोड़ किया है जो दिन में गली गली घुमकर साड़ी बेचते और रात होते ही लूट की वारदात को अंजाम दिया करते थे। यह गैंग सिर्फ सोने के आभूषण पहने लोगों को ही निशाना बनाता था। इस गैंग ने दिल्ली एनसीआर में डकैती और लूट की सिलसिलेवार वारदात को अंजाम देकर आंतक मचा रखा था। गैंग एक ही दिन में पांच से छह लूटपाट और डकैती की वारदात को अंजाम दे देता था। यह गैंग इतना शातिर था कि लूटपाट की वारदात के लिए चोरी के वाहन इस्तेमाल करता था।
गैंग के दो बदमाश यूपी के मुजफ्फरनगर निवासी 25 वर्षीय मुहम्मद मुस्तकीम और 35 वर्षीय मेंहदी हसन को गिरफ्तार किया गया है। गिरोह का सरगना मुहम्मद मुस्तकीम है।
गैंग के तीन सदस्य सुल्तान, सावेज और एक अन्य अभी फरार हैं।
फिलहाल इनकी गिरफ्तारी से पुलिस ने दिल्ली एनसीआर के 9 मामले सुलझाने का दावा किया है। पुलिस आरोपियों को रिमांड पर लेकर उनसे पूछताछ कर बाकी वारदातों का पता लगाने का प्रयास कर रही है।
 
पुलिस ने बदमाशों के पास से लूट की कार, पिस्टल, सोने की चेन, अंगूठी और लूटा गया स्कूटर बरामद किया है।
 
सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की डीसीपी श्वेता चैहान के अनुसार शिकायतकर्ता नितिन धवन ने बताया कि दिनांक आठ जून 2022 की रात करीब 10 बजकर 25 मिनट के आसपास वह अपने दोस्त के साथ अपने घर के पास खड़ा था। तभी राजस्थान नंबर आरजे 2541 की एक शेवरले क्रूज कार से अचानक चार लोग नीचे उतरे और हथियार के बल पर नितिन से मारपीट कर वे उसकी सोने की चेन, सोने का कड़ा और सोने की अंगूठी लूट कर अपनी कार में मौके से फरार हो गए। इसकी कीमत दस लाख रुपये बताई गई। पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई।
 
इस घटना को लेकर थाना राजेंद्र नगर में एफआईआर संख्या 167/22 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
 
लूट की वारदात से इलाके में दहशत का माहौल बन गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी श्वेता चैहान ने दो टीमों का गठन किया। योगेश मल्होत्रा एसीपी ओपरेशन की सुपरविजन व संदीप गोदारा इंचार्ज सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट एएटीएस के नेतृत्व में पहली टीम एसआई मजीद खान, रविशंकर, एएसआई अजय, उम्मेद, कंवरपाल, राकेश, परवीन, लुकमान, हैड कांस्टेबल विनोद, शेखर, निर्मल, सुरेंद्र, परवीन, अतुल, संदीप, धीरज और राजेश की बनाई गई। राजेश बराड एसएचओ राजिंदर नगर के नेतृत्व में एसआई धर्मेंद्र, हैड कांस्टेबल प्रदीप और नरेंद्र की दूसरी टीम का गठन किया गया।
 
सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट एएटीएस की टीम ने सबसे पहले क्राईम सीन के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगाला। सीसीटीवी फुटेज को बारिकी से स्कैन करने पर टीम ने पाया की राजस्थान नंबर आरजे 2541 की एक शेवरले क्रूज कार से पांच लोगों ने लूट की वारदात कों अंजाम दिया था। सभी संदिग्धों ने मास्क और टोपी पहन रखी थी।
 
जीपनेट पर सर्च करने पर टीम को पता चला कि वारदात में इस्तेमाल कार को दिनांक दो जून 2022 को गाजियाबाद इलाके से लूटा गया था।
 
सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट एएटीएस इंचार्ज संदीप गोदारा की टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपराधियों की पहचान करना था। एएटीएस इंचार्ज संदीप गोदारा ने दिल्ली एनसीआर में मुखबिरों का जाल बिछा दिया।
 
जांच के दौरान टीम को यह भी पता चला की राजेंद्र नगर की घटना से पहले उसी दिन सुबह हरि नगर इलाके में स्कूटी सवार एक युवक से हथियार के बल पर सोने की चेन उसी कार में सवार होकर लूटी गई थी।
 
टीम को शकरपुर इलाके की एक विडियों रिकार्डिग भी मिली जिसमें कुछ बदमाश बन्दुक के दम पर एक दुकानदार को लुटने की कोशिश कर रहे थे लेकिन दुकानदार के शोर मचाने पर सभी बदमाश मौके से भाग गये।
 
सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट एएटीएस इंचार्ज संदीप गोदारा की टीम सीसीटीवी फुटेज में कैद अपराधियों के क्राईम करने की मोडस ऑपरेंडी की मदद से उनकी पहचान के लिए अथक प्रयास कर रही थी।
 
शुरूआती जांच में टीम को पता चला की यह गैंग पहले स्कूटी, वाईक या कार को लूटता है फिर पुलिस को चकमा देने के लिए उसी वाहन से वारदात को अंजाम देता है। टीम को यह भी पता चला की यह गैंग इतना शातिर है कि एक दो वारदातों के बाद चोरी के वाहन को छोड़ देता था और आगे वारदातों के लिए दूसरे वाहन को लूटता था।
 
राजेंद्र नगर की डकैती की घटना के बाद टीम ने पांच दिनों तक कड़ी मेहनत की और राजेंद्र नगर से डाबरी तक 20 किलोमीटर के दायरे में जिस रूट से बदमाशों के भागने की आशंका थी उस रूट पर पड़ने वाले सभी कॉर्नर्स, मल्टीप्ल टर्न्स, मकानों, दुकानों, बस स्टॉप और रेड लाइट पर लगे सैकड़ो सीसीटीव फुटेजों को खंगाला।
राजेंद्र नगर में डकैती की वारदात को अंजाम देकर चोरी की शेवरले क्रूज कार से भागते समय वदमाशों ने कई जगह रेड लाइटों को जम्प किया था। रेड लाइट जम्प करने का ऑफेंस ट्रैफिक के कैमरों में कैद हो गया था।
 
ट्रैफिक के कैमरों की मदद से टीम ने गैंग के आने और जाने का रूट बनाया तो पता चला की डाबरी इलाके में कहीं छुपे हुए हैं।
 
किन्तु टीम के पास न तो बदमाशों का कोई मोबाईल नंबर था न ही यह पता था की डाबरी इलाके के किस घर में छुपे हुए हैं। लेकिन ट्रैफिक के कैमरों से मिले चोरी की शेवरले क्रूज कार के रूट से टीम इस बात के लिए जरूर श्योर थी की बदमाश डाबरी इलाके में ही कहीं आकर छुप गए हैं।
 
डाबरी जैसे घनी आबादी भरे इलाके से एक शेवरले क्रूज कार खोजना अपने आप में बहुत बड़ा चैलेंज था लेकिन सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट एएटीएस की टीम पिछे नहीं हटी और डाबरी इलाके में मुखबिरों को एक्टीव कर दिया।
 
लेकिन मुखबिरों को एक्टीव करने के बाद भी टीम के हाथ कुछ न लगा। अब गैंग को दबोचने के लिए सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट एएटीएस इंचार्ज संदीप गोदारा ने दूसरा रास्ता अपनाया। टीम अब खबरियों की दी गई जानकारी पर निर्भर नहीं रहना चाहती थी। बदमाशों को दबोचने के लिए संदीप गोदारा ने डाबरी इलाके में हर घर, दुकान, आफिस, पार्किंग व धार्मिक स्थलों पर खड़ी हर एक शेवरले क्रूज कार को जांचने की रणनीति बनाई।
 
साथ ही संदीप गोदारा इंचार्ज सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट एएटीएस को एक बात का यह भी डर सता रहा था कि गैंग एक दो वारदातों के बाद वारदात में इस्तेमाल वाहन को बदल देता है अगर गैंग ने शेवरले क्रूज कार का इस्तेमाल करना बंद कर दिया तो उन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाएगा। इससे पहले ही गैंग के लोग शेवरले क्रूज कार को बदले डाबरी इलाके से वारदात में इस्तेमाल शेवरले क्रूज कार को हर हाल में खोजा जाए।
 
संदीप गोदारा इंचार्ज सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट एएटीएस यह अच्छी तरह जानते थे कि किसी भी डिस्ट्रिक की पुलिस के डिवीजन और सब डिवीजन होते हैं। जिन्हे आगे बीट में बाटा जाता है। एक कांस्टेबल को एक बीट मिलती है। और कांस्टेबल जिम्मेवारी होती है की वो अपने इलाके के हर इंसान की पूरी जानकारी रखे।
 
संदीप गोदारा इंचार्ज सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट एएटीएस ने डाबरी इलाके के चप्पे चप्पे को छानने के लिए बीट कांस्टेबलो की मदद ली। टीम ने बड़े स्तर पर डाबरी इलाके में शेवरले क्रूज कार को खोजने का सर्च अभियान चलाया।
 
टीम की मेहनत रंग लाई। सस्पेक्ट शेवरले क्रूज कार डाबरी इलाके के नाला रोड़ सड़क के किनारे स्पाॅट हो गई।
 
एक टीम ने कार के पास ट्रैप लगाकर इंतजार किया। जैसे ही मुस्तकीम और मेहंदी हसन कार के पास पहुंचे, पुलिस ने दोनों को काबू कर लिया। इन लोगों ने लूटपाट में अपना हाथ होने की बात कबूल कर ली। मुस्तकीम ने बताया कि वह गैंग लीडर है।
 
गैंग का सरगना मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश निवासी 25 वर्षीय मोहम्मद मुस्तकीम पुत्र दिलशाद 10वीं तक पढ़ा है और उत्तम नगर में किराए पर रहता था। यह सड़क पर फेरी लगाने वाले के रूप में साड़ी और लेडीज सूट बेच रहा था। इसके खिलाफ पहले से ही थाना उत्तम नगर में एफआईआर संख्या 973/20 धारा 394/34 के तहत एक मामला दर्ज है। यह सद्दाम गोरी गिरोह का प्रमुख सदस्य है। सद्दाम गोरी फिलहाल जेल में है अब इसने इस गिरोह को चलाना शुरू कर दिया है।
 
गैंग का दूसरा 35 वर्षीय आरोपी मेहंदी हसन पुत्र रियाज भी मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। यह भी सड़क पर फेरी लगाने वाले के रूप में साड़ी और सूट बेचता था। यह सुल्तान और मुस्तकीम के संपर्क में आया और लूटपाट शुरू कर दी।
 
इनकी गिरफ्तारी से दिल्ली एनसीआर में डकैती के नौ मामलों का पर्दाफाश हो गया है। इनके पास से लूटी शेवरले क्रूज कार, एक स्कूटी, एक सोने की चेन, दो अंगूठियां, एक आटोमेटिक बरेटा पिस्टल, 5 जिंदा कारतूस बरामद हुए है। इनकी गिरफ्तारी से थाना राजिंदर नगर के दो, थाना हरि नगर के तीन, थाना मधुबन बापूधाम, उत्तर प्रदेश का एक, थाना पश्चिम विहार का एक, थाना पश्चिम विहार ईस्ट का एक व थाना जहांगीरपुर का एक मामला सुलझ गया है। गैंग के तीन सदस्य सुल्तान, सावेज और एक अन्य अभी फरार हैं। पुलिस फरार बदमाशों को दबोचने के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।
 
सनसनी आॅफ इंडिया नेटवर्क